(इस कहानी को काल्पनिक ही समझा जाए। मुख्य पात्र के डोळ के साथ किसी अन्य का डोळ मिल रहा हो तो इसे महज एक संयोग समझा जाए।)
उसका नाम प्रेमाराम था। उसका नाम उसको उसी तरह नापसंद था जिस तरह दो जानी दुश्मन नापसंदगी की हद कर देते हैं। प्रेमाराम ने भी कर दी। अब वो टॉम था। प्रेमा राम जो अब टॉम था का कद 5 फ़ीट 11 इंच के आसपास था। सीना भीतर की ओर धंसा हुआ और कंधे झुके हुए, गोफिये बैठे हुए, पक्का रंग, नजर की ऐनक में वो कीड़िया सा दिखता था। ये सन 2004 की बात है, हम ग्यारहवीं क्लास में पढ़ते थे। सेक्शन था 'ई', जिसका हर बच्चा शरारती ही नहीं अव्वल दर्जे का रोळ हुआ करता था, मगर थे सभी प्रतिभाशाली, क्रिएटिविटी कूट कूट कर भरी हुई थी। क्लास के युवतर बच्चों की बातचीत का विषय इराक, ईरान, फिलिस्तीन, इजरायल, चीन, अमरीका और भारत की राजनीति, विदेश नीति आदि के साथ- साथ क्रिकेट, लड़कियां, अध्यापिकाओं का तो पता ही नहीं कि ख्यालों में कितनी बार प्यार करते थे। प्रीति जिंटा से प्यार की कल्पना में बहुत सुख मिलता तो एक अन्य अभिनेत्री जिसका नाम नही पता को सोचते हुए बहुत गहरे और गंभीर संभोग सुख की कल्पना और स्वप्नदोष और हस्तमैथुन तक हुआ करता था। बस यही वो भी खराब हो गया। वो ही अपना टॉम उर्फ प्रेमा राम।
इस संगत और बंतळ का असर था कि वो शहर का टॉम क्रूज बनना चाहने लगा था। एक कोई भूली भटकी लड़की उसके साथ भी थी जो उसके शब्दो मे सच्चा प्यार थी। पहला प्यार। इसीलिए लड़की एंजेलिना जोली होना चाहती थी। टॉम अक्सर अमरसिंह चमकीला के गीत सुनता था और जोली को भगा ले जाने के ख़्वाब देखा करता था।
-"होर कोई तैनू जे व्याह के लै ग्या जट्ट दा ज्योणा जग ते ना रै ग्या" उसने जोली के घर के पास जाकर चाइनीज मोबाइल में ऊँची आवाज़ में गीत लगा दिया, जोली बाहर आई, टॉम को देखकर मुस्कराई, टॉम ने शर्ट का कॉलर उठाकर स्टाइल मारी और एंजेलिना जोली शर्माकर रह गयी..........
अपने दर्द ए दिल, जिगर, फूल और कांटे, अजय देवगन आदि सबको मिलाकर अपने टॉम ने खत लिखा और जोली को पकड़ा दिया, बस यहीं उनके बुरे दिन शुरू हो गए क्योंकि जोली ने ख़त पढ़ तो लिया था मगर चारपाई पर रखकर भूल गयी थी।
टॉम को गली में आडा पटक के कुटाई की जा रही थी। उसके ढुंगे बांदर जैसे किये जा रहे थे और जोली चिल्ला रही थी, "मारो इस हरामी को, ये मुझे छेड़ता रहता है।" इस आवाज़ को सुनकर वो ज़ख्मी दिल और बेवफाई के दर्द को आंखों में लाकर मिथुन स्टाइल में रोना चाहता था लेकिन ढुंगो की पीड ज्यादा थी।
उसने प्रण लिया कि कभी उसका मुंह नही देखेगा। दिल जले, सनम बेवफ़ा, पत्थर के जन्म और खून भरी मांग-- वो इन नामो की ही तरह अजीब गुस्से से भरा था। पहला प्यार झूठा होता है। इस कांड के बाद जोली शहर के जॉन अब्राहम के साथ सैट है...... प्रेमाराम उर्फ टॉम का पहला प्यार असफल होकर मर गया।
उन्हीं दिनों सानिया मिर्ज़ा टेनिस के क्षेत्र में चर्चित हुई थी। प्रेमा राम उर्फ टॉम ने उसका मैच देखा और देखता ही रह गया, स्कर्ट- टॉप में हरिणी सी उछलती कूदती सानिया मिर्ज़ा से उसको प्यार हो गया। उसका बंटाधार हो गया। जिस दिन उसने मैच देखा उसके अगले दिन स्कूल में आकर उसने घोषणा कर दी कि वो सानिया से शादी करेगा, धर्म की बेड़ी तोड़ देगा, विध्वंस कर देगा, फट्टे चक देगा, बम फोड़ देगा, रेल गाडी के ऊपर से छलांग लगा देगा, आग लगा देगा, फाड़ देगा दुनिया को, चीर देगा..... वो थूक उछाल- उछाल कर बोल रहा था तो उसका काचर सा मुंह बहुत दयनीय लग रहा था। उसने नारा लगाने के लिए जैसे ही हाथ उठाया कि झटका लगा और उसका चश्मा नीचे गिर गया, काच में तरेड़ आ गयी, शायद इसलिए कि वो खुद बावळी तरेड़ था। अब उसे दिख नहीं रहा था, रमेश ने उसको चश्मा पहनाया और बोला, " ठोक्यो सानिया गो, दिन में ई तन्नै रातींदो है तो रात नै के जट दीसै " मगर उसने बात दिल पर नहीं ली और सानिया की जानकारी जुटाने में लग गया।
एक दिन वो दौड़ा दौड़ा आया, ख़ुशी में लहराता हुआ और आकर जेब से राजस्थान पत्रिका का रंगीन पृष्ठ निकाला और बोला, " देखो- देखो सानिया की डेट ऑफ़ बर्थ और मेरी डेट ऑफ़ बर्थ एक ही है, 15 नवम्बर 1986, कहा था ना मैंने कि वो मेरे लिए ही बनी है। " शायद 1987 में ही पैदा हुई हो मगर प्रेमा को वो हमउम्र ही लग रही थी। उसकी तीखी नाक में झूलती नथ पर उसका दिल कूदने लगा था और इतनी जोर जोर और ऊंचाई तक कूदने लगा कि उसकी ग्यारहवीं क्लास में एक विषय में सप्लीमेंट्री आ गयी। अगले साल बारहवीं में जैसे तैसे मर पड़ कर पास हुआ, स्नातक में पहुंचा तब भी उसका एकमात्र प्यार सानिया मिर्ज़ा ही थी।
फिर एक दिन आई एक मनहूस खबर जिसने प्रेमाराम के प्रेम की धज्जियां उड़ाकर रख दी, " सानिया मिर्ज़ा और शोएब मलिक का निकाह...." प्रेमा राम का प्रेम सड़क पर आ गया और उसी दिन उसने ऐलान-ए- जंग कर दिया। जा बेवफा जा मैं तुझसे प्यार नहीं करता। एक ऐसी ही लड़की थी.... जीता था जिसके लिए.... दर्द भरे गाने सुने और बीड़ी पीते हुए बेदर्द दुनिया वालो को मिथुन स्टाइल में गालियां दी और घोषणा की "अब इस बेवफ़ा का कोई मैच में नहीं देखूंगा"
स्नातक के बाद उसका और मेरा सम्पर्क टूट गया था मगर हवाओं में तैरती खबर जब मेरे पास पहंची तब मैंने माथा पीट लिया था, क्योंकि प्रेमा राम का तीसरा सच्चा प्यार ' ज्वाला गुट्टा' में बसा था।
सतीश छिम्पा

बहुत बढ़िया सतीश भाई!
ReplyDeletePost a Comment