बूढ़ा जो प्रेम कहानियां पढ़ता है....
● सतीश छिम्पा
चिली के लुइस सैपल वैदा का यह अद्भुत उपन्यास है
(बूढ़ा जो प्रेम कहानियां पढ़ता है समेत ये सभी उपन्यास विश्व के महान उपन्यासों में आते हैं। वाईजल की उपन्यास श्रंखला और लुइस के इस नॉवल का हिंदी में आउट ऑफ प्रिंट होना बहुत बड़ी विडंबना है।)
बूढ़ा जो प्रेम कहानियां पढ़ता है (बुढा जो इश्किया कहाणियां पढ़दा) चिली के लुइस सैपल वैदा का अद्भुत उपन्यास है। शाहमुखी में अनुवाद अफ़ज़ल रंधावा ने किया है और पंजाबी अनुवाद जोगिंदर पाल मान का है।
- " ले भई, मरे हुए आदमी के बखेड़े में मैं बिलकुल ही भूल गया। मैं तेरे लिए किताब लेकर आया हूँ।"
बूढ़े की आँखें चमक उठी।
-" प्रेम कहानियां ? "
डॉक्टर ने हाँ में सिर हिलाया।
एन्तोनियो जोज़ बोलीवार प्रेम कहानियां पढ़ता है और हर बार डॉक्टर उसके लिए ताजा रसद ले आता।
- "दुःखी कर देने वाली कहानियां ?" बूढ़े ने पूछा।
- "तूं रो रो कर मर जाएगा ।" डॉक्टर ने उसे भरोसा दिलाया।
-" लोग जो सच मुच एक दूसरे को प्यार करते हैं ? "
- "ऐसे, जैसे पहले कभी किसी ने प्यार नहीं किया । "
- " क्या वे कष्ट भी बहुत काटते हैं ? "
- "मुझसे तो यह सारा कुछ बहुत ज्यादा है ।" डॉक्टर ने जवाब दिया।
सच बात यह थी कि डॉक्टर रूबी कंडोलौ एचमन कभी उन उपन्यासों को पढ़ता ही नहीं था।
जब पहली बार बूढ़े ने उसे पढ़ने के लिए कुछ किताबें ला देने को कहा तो यह भी साफ़ कर दिया कि दिल को पीड़ाओं से जलाने वाली, कठिन प्रेम की सुखांत कहानियां उसकी पसन्द हैं।
यह क्लासिकल उपन्यास दक्षिण अमेरिका के जंगलों में बसे लोगों के जीवन, जीवन शैली, उनके संघर्ष और रुचियों के बारे में किसी दस्तावेज़ की तरह है। दांतों का डॉक्टर जो शहरी है मगर जंगल में रहकर कुदरत और कबीलों और जानवरों के कानून और रिवाज़ों को जानता है- वो जंगल का ही बन गया है। एक हब्शी वेश्या जो साहित्य पढ़ती है। कुल मिलाकर यह रूह को बेचैन कर देने वाला एक अद्भुत उपन्यास है।
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विश्व साहित्य.....
(ऐली वाइज़ल)
● सतीश छिम्पा
( सन 1986 ई में नॉबेल शांति पुरस्कार प्राप्त ऐली वाइज़ल के उपन्यास dawn और night के पंजाबी अनुवाद पौ' फुटाला और रात )
. इस सदी के महान और जीवन के उन दार्शनिक लेखकों से अलग ऐली लोक के रचयिता हैं। वे उनमे से है- जो बहुत जरूरी और ठोस नाम है। और यही कारण है कि घटनाओ को मूल्यों के बजाए द्वंद्वात्मक तऱीके से रखते हुए लक्ष्य की रूपरेखा तैयार करते हैं- उस समय के रचनाकारों में मुख्य नाम ऐली वाइज़ल का भी शामिल है। ऐली वाइज़ल भी स्टीफन स्वाइग की तरह ही यहूदी थे- जिन्हें हिटलर के यातनागृह में रखा गया था- जहां अमानवीय जुल्म और दमन को सहते हुए बस संयोग से ही बच गए थे ।
स्वाइग भी इसी काले दौर में उठे थे। हिटलर के घनघोर नाजीवादी रुख को सहना, ढोना और सामना करना पड़ा और यह रचनाकार जो अंधेरे में कैद था- अवधी पूरी की और निकल गया। अमेरिका में निर्वासन भोगते हुए ऐली और उनके साथी- लगातार जूझते हुए और संघर्षों से होकर स्थापित हुए थे- ख्याति उनके नाम के पीछे टंगे पुछल्ले की तरह हमेशा साथ रही। जैसे स्मृतियों के साथ अटकी हो समय की कोई किरच- जैसे जूझने के बाद उज्ज्वल जीवन का रंग। अपनी पितृभूमि से निर्वासन, पलायन या ओट को तलाशता व्यक्ति पीड़ाओं का समुद्र होता है- जड़ से कट हुआ दरख्त जो धीरे धीरे मर रहा हो जैसे। लेखक के वैचारिक प्रतिबद्धता भी उतनी ही जरूरी है जितना कि जीवन खुद।
ऐली वाइज़ल के विख्यात तीन (श्रंखला में) उपन्यासों में दुर्घटना, रात, dawn (पंजाबी अनुवाद पौ' फुटाला) नाजी जर्मनी की यहूदी विरोधी मुहीम और अमानवीय अत्याचारों और द्वितीय विश्वयुद्ध के घिनोने युद्ध अपराधों, नस्लकुशी और आस्थाओं के टूटने, बिखरने, बनने और मानव जीवन को बचाने की कोशिशों की बेहतरीन कहानी है। कातिल और खून से भीगे देवताओं पर अटूट आस्थाएं जब टूटने लगीं और धरती के देवता जब युद्धों में सलग्न हो, मनुष्यता को रौंदने लगे, बर्फ जब ब्रेड की जगह लेने लगी तब भूख और दर्द से बेहाल जनता 'क्यों, कैसे, कब ?' को जीवन के प्रश्न बनाने लगे।
कहना ना होगा कि ऐली वाइज़ल ने युद्ध को अपनी देह पर भोगा था और यह उपन्यास त्रैयी उसी जुल्म, शोषण और अन्याय की वेदना का प्रस्फुटन है।
दर्शनक स्तर पर ये दोनों उपन्यास, उपन्यास परम्परा की जमीन से बहुत अलग है। इनमे कोई गूढ़ रहस्यात्मकता नहीं बल्कि जीवन और मृत्यु के दार्शनिक कारणों की वैज्ञानिक पड़ताल के साथ- साथ तानाशाह हिटलर की मानसिक विक्षिप्तता, उसके अंधभक्तों के पागलपन और प्रताड़ित जनता के दुखों और ईश्वर से मोह भंग की अद्भुत कहानियां है।
अतिश्योक्ति नहीं होगी अगर मैं कहूँ कि ये उपन्यास हर आयु वर्ग के लोगों को जरूर पढ़ना चाहिए।
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( 'दुर्घटना') ऐली वाइज़ल
" स्पष्टता भविष्य की जीत होती है, मनुष्य की नहीं। यह स्वतंत्रता वाला कार्य है जो अपने भीतर स्वतंत्रता का निषेध भी सम्हाले बैठा है। मनुष्य को सदा चलते, खोजते, तोलते रहना चाहिए। अपना हाथ बढ़ाकर ख़ुद को समर्पित करते, खोजते रहना चाहिए", 'दुर्घटना' ऐली वाइज़ल का विख्यात उपन्यास त्रैयी में से एक उपन्यास है। ऐली वाइज़ल की यह पहली की कृति मैंने पढ़ी है। अद्भुत उपन्यास है। ख़ास बात यह है कि वाइज़ल के पास केवल घटनाओं का गुंफन मात्र नहीं है, नां ही संवादों की स्थूलता है बल्कि उनके यहां एक ठोस दार्शनिक धरातल है जो बहुत गहराई तक मनुष्य की भीतरी गुफ़ाओं की थाह लेता है। इस उपन्यास में अँधेरे से उजालों की और लौटते मनुष्य का बेहतरीन चितराम पेश किया गया है। एक बात जो मैं कहना चाहूंगा, वो यह कि "अवसाद ग्रस्त लोग इससे दूर रहे"।
के. एल. गर्ग जी का अनुवाद तो स्तरीय और बढ़िया है ही इसके अलावा यह भी विशेष बात है कि ये तीनो उपन्यास हिंदी में अभी उपलब्ध ही नही है।
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