मेरा जीवन' चार्ली चैप्लिन की आत्मकथा



चार्ली :- जिसने भूख की लय पर दर्दों का गीत गाया

(चार्ली चैप्लिन हास्य के नहीं बल्कि ट्रैजेडी के, दुखांत के अभिनेता थे।  जीवन और संघर्षों का सम्मान करने वाले इस महान अभिनेता को सलाम।)
               
"इंसानों की नफरत ख़त्म हो जाएगी ,
तानाशाह मर जायेंगे, और जो
शक्ति उन्होंने लोगों से छीनी वो लोगों के
पास वापस चली जायेगी . और जब तक लोग
मरते रहेंगे , स्वतंत्रता कभी ख़त्म नहीं होगी"

     ( ० चार्ली चैपलिन)

आत्मकथाएं बहुत सी पढ़ी है जिनमे थोथा आदर्शवाद कपटी नैतिकता, अश्लील सच और खोखली मानवता भरी पड़ी होती है.मगर  "चार्ली चैप्लिन" ने "मेरा जीवन" में खोखले आदर्शों की धज्जियां उड़ा कर रख दी है..... इतनी बेबाक आत्मकथा कि कहीं पर भी चार्ली आत्ममुग्ध नज़र नहीं आते हैं और ना ही अपने जुझारू जीवन संघर्ष की शेखी बघारते हैं और आत्मालोचना और आत्मव्यख्या को वैज्ञानिक तरीके से पाठकों के सामने प्रस्तुत करते हैं। चार्ली सिनेमा के सबसे संजीदा और रचनात्मक और सहज, सरल और जादुई व्यक्तित्व के व्यक्ति थे। मूक फिल्मों के जमाने का सुपर स्टार चार्ली जिसने भूख की बिसात पर रोटी का गीत गाया। चैप्लिन जिसको हास्य अभिनेता के रूप में दुनिया जानती है मगर वो हास्य नही था- ट्रैजेडीक था। जीवन और संघर्ष को जिसने कला के बूते स्थापित कर दिया था। वे तत्कालीन युग के सबसे ज्यादा  चर्चित  लोगों में से एक थे जिन्होंने अपनी फिल्मों में अभिनय, निर्देशन, पटकथा, निर्माण और अंततः संगीत दिया। मनोरंजन के कार्य में उनके जीवन के पूरे साल बीते, जलेवोचिक और विक्टोरिया मंच और यूनाइटेड किंगडम के संगीत कक्ष में उम्र बिता दी थी, अपनी मृत्यु तक वो ऊर्जस्वित रहा था। कुलीन मगर निजी जिंदगी में विवाद बहुत रहे । 


चैप्लिन की शुरुआती कीस्टोन में मैक सेनेट की अत्यधिक शारीरिक कॉमेडी और अतिशयोक्तिपूर्ण इशारों के मानक का उपयोग किया गया था। चैप्लिन का मूकाभिनय सूक्ष्म था और सामान्य कीस्टोन आखेट और भीड़ के दृश्य की जगह, रोमांटिक और घरेलू नकल के लिए उपयुक्त हो सकता था। दृश्य प्रतिबन्ध शुद्ध कीस्टोन थे, लेकिन; बहेतू भूमिका में लातों और ईंटों के साथ अपने दुश्मन पर आक्रामक हमला करना था। फिल्म दर्शकों ने इस नए हंसमुख गँवारू हास्य अभिनेता को पसंद किया, हालांकि आलोचकों ने चेतावनी दी कि उनकी हरकतें अश्लीलता की सीमा पर हैं। चैप्लिन को जल्दी ही अपनी फिल्मों का निर्देशन और संपादन कार्य सौंपा गया था। फिल्मों में अपने पहले वर्ष उन्होंने सेनेट के लिए 34 शॉर्ट्स बनाए, साथ ही ऐतिहासिक हास्य फीचर "टिल्लिस पंक्चर्ड रोमांस ".
   कर्ज और खर्च के कारण उनके उनका आगे बढ़ना मुमकिन नही था, मगर विश्व युद्घ में अमेरिका के प्रवेश के बाद, चैप्लिन अपने करीबी दोस्त डगलस फेयरबैंक्स और मेरी पिक्कफोर्ड के साथ एक स्वतंत्रता बांड्स के प्रवक्ता बन गए।

चैप्लिन की अधिकांश फिल्में कीस्टोन, एस्सने और म्यूचुअल अवधि में वितरित हुईं.1918 में चैप्लिन द्वारा अपनी प्रस्तुतियों का नियंत्रण ग्रहण करने (और प्रदर्शकों और दर्शकों को उनके लिए इंतज़ार कराने) के बाद, उद्योगपतियों ने चैप्लिन के पुराने हास्य को वापस लाकर उनकी मांग को पूरा किया। फिल्मों को फिर से गढ़ा गया, पुनः शीर्षक गढ़ा गया और बार-बार पुन: प्रचलित किया गया, पहले सिनेमाघरों के लिए, फिर गृह फिल्म बाजार और हाल के वर्षों में, गृह वीडियो के लिए। एस्सने भी इस अभ्यास का दोषी था, पुरानी फिल्म क्लिपों और खारिज प्रदर्शन से 'नई' चैप्लिन  ट्रैजेडीक हास्य, दुखांतिकाएं बनाते थे। उनकी  दो मूवीज़ 'द ग्रेट डिक्टेटर', 'मॉर्डन टाइम्स'... जो अपने यथार्थ के कारण कालजई हो गयी थी।

       The Great डिक्टेटर - अमर, कालजई फ़िल्म रही, इसमे हिटलर की पोशाक में चार्ली भाषण देता है वो एक युग बन गया है। :--

 
"तुम ही असली अवाम हो, तुम्हारे पास ताकत है, ताकत मशीन बनाने की, ताकत खुशियाँ पैदा करने की, तुम्हारे पास ज़िन्दगी को आज़ाद और ख़ूबसूरत बनाने की, इस ज़िन्दगी को एक अनोखा अभियान बना देने की ताकत है. तो आओ, लोकतंत्र के नाम पर इस ताकत का उपयोग करें, हम सब एक हो जाएं. एक नई दुनिया के लिए संघर्ष करें, एक खूबसूरत दुनिया, जहाँ इंसानों के लिए काम का अवसर हो, जो हमें बेहतर आनेवाला कल, लंबी उम्र और हिफाज़त मुहैया करे. धोखेबाज इन्हीं चीजों का वादा करके सत्ता पर काबिज हुए थे, लेकिन वे झूठे हैं. वे अपने वादे को पूरा नहीं करते और वे कभी करेंगे भी नहीं. तानाशाह ख़ुद तो आज़ाद होते हैं, लेकिन बाकी लोगों को गुलाम बनाते हैं. आओ हम इन वादों को पूरा करवाने के लिए लड़ें. राष्ट्रीय सीमाओं को तोड़ने के लिए, लालच को ख़त्म करने के लिए, नफ़रत और कट्टरता को जड़ से मिटने के लिए, दुनिया को आज़ाद कराने के लिए लड़ें. एक माकूल और मुकम्मिल दुनिया बनाने की लड़ाई लड़ें. एक ऐसी दुनिया जहाँ विज्ञान और तरक्की सबकी जिन्दगी में खुशहाली लाए."
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             आज सबसे ज्यादा जरूरत है फासिस्ट ताकतों से ताउम्र जूझते रहने वाले और हिटलर की मानवद्रोही  भावना से लोहा लेने वाले चार्ली चैपलिन जैसे महान अभिनेताओं की। जो अलग व्यक्तित्व रखे, मनुष्यता से भरे हुए...... चार्ली को पूरी दुनियां हास्य अभिनेता के बतौर जानती है। मगर हकीकत इसके बिलकुल उल्ट है। लोगों को हंसाने वाले इस जिंदा रहने के जज़्बे से भरे इनसान ने बाल्यवस्था में ही भूख, गरीबी, तंगहाली से टक्कर लेनी शुरू कर दी थी। 

     बकौल चार्ली "मैंने मोटर गैराज से लेकर बैकरी तक हर उस जगह काम किया है जहाँ बहुत ज्यादा श्रम से मुश्किल से एक वक्त की पाव का जुगाड़ हो पाता था।"

              "जो लोग रविवार के दिन भी अपने परिवार के साथ बैठ कर लंच नहीं कर सकते थे, वे दलिद्दर भुखमरे कहलाते थे- हम उन्ही में से एक थे"


    The Modern times मूवी

      The modern time फिल्म में चार्ली ने इसी तरह की मजदूर जीवन शैली को उजागर किया है जब दो वक्त की रोटी के लिए मजदूर को बुरी तरह खपना पड़ता है। परिस्थितियाँ आज भी बदली नहीं है। वैसी ही है। मगर आज के अभिनेताओं की कला फगत रुपया कमाने का साधन हैं-जबकि चार्ली जीवन भर मानवीयता विरोधी तानाशाहों। साम्राज्यवादियों और शोषकों के विरुद्ध काम करते रहे थे। the great dictator फिल्म में नाई की भूमिका निभाते चार्ली ने अद्भुत तरीके से हिटलर को बेनकाब किया है।
    
      पेट की आग ने चार्ली को बचपन में ही मंच पर चढ़ा दिया था, जिस पर वे सारे जीवन काम करते रहे और अपने दर्दों की लाश पर चढ़ लोगों को हंसाते रहे।
  बकौल विष्णु खरे- "चार्ली वो अभिनेता थे जो भीड़ में खड़े होकर हाथ के इशारे से बता सकते थे कि राजा भी उतना ही नंगा है, जितना मैं"      

    आत्मकथाएं बहुत सी पढ़ी है जिनमे छद्म, कपटपूर्ण झूठ, खुद का खुद ही पर मुग्ध होना, बीमार आदर्शवाद और खोखली नैतिकता भरी पड़ी होती है। मगर "चार्ली चैप्लिन" ने "मेरा जीवन" में खोखले आदर्शों की धज्जियां उड़ा कर रख दी है.....इतनी बेबाक आत्मकथा कि कहीं पर भी चार्ली आत्ममुग्ध नज़र नहीं आते हैं और ना ही अपने जुझारू जीवन संघर्ष की शेखी बघारते हैं और आत्मालोचना और आत्मव्यख्या को वैज्ञानिक तरीके से पाठकों के सामने प्रस्तुत करते हैं। मेरी पढ़ी कुछ बहुत मह्यवपूर्ण किताबो में से एक अब यह आत्मकथा भी आई।


   (१)
          अपनी आत्मकथा में चार्ली लिखता है कि, " रोज़ रात को जब माँ थियेटर से वापिस लौटती थी तो उसका यह दस्तूर-सा था कि मेरे और (मेरे बड़े भाई) सिडनी के लिए खाने की अच्छी-अच्छी चीज़ें मेज़ पर ढक कर रख देती थी ताकि सुबह उठते ही हमें मिल जायें - रंग-बिरंगे और सुगंधित केक का स्लाइस या मिठाई। इसके पीछे आपसी रज़ामंदी यह थी कि हम सुबह उठ कर शोर-शराबा नहीं करेंगे। वह आम तौर पर देर तक सो कर उठती थी।

•   (२)

नर्स ने माँ से कहा,"इसके गन्दे मुंह की वजह से इस पर नाराज़ ना हों"
माँ हंसी और मुझे याद है कि किस तरह से ये कहते हुए उसने मुझे अपने सीने में भींच लिया था और चूम लिया था, "तेरी इस सारी गन्दगी के बावजूद मैं तुझसे प्यार करती हूँ मेरे लाल"

     •  (३)

"काश किसी ने कारोबारी दिमाग इस्तेमाल किया होता, प्रत्येक अध्ययन की उत्तेजनापूर्ण प्रस्तावना पढ़ी होती जिसने मेरा दिमाग झकझोरा होता, तथ्यों के बजाए मुझमे रूचि पैदा की होती, अंको की कलाबाजी से मुझे आनन्दित किया होता, नक्शों के प्रति रोमांच पैदा किया होता, इतिहास के बारे में मेरा दृष्टिकोण विकसित किया होता, मुझे कविता की लय और धुन को भीतर उतारने के मौके दिये होते तो मैं भी आज विद्वान बन सकता था"



      चार्ली के इन संवादों को यहां देने का मतलब है कि उनकी फिल्म की दीठ कितनी भावपूर्ण मग्रर जीवन मे डूबी हुई होगी
   ट्रेजेडी के अभिनेता के साथ जुड़ा खतरनाक विवाद निम्नलिखित है .....

" मैं कम्युनिस्ट नहीं हूँ, फिर भी उनके विरोध में खड़ा होने से इनकार करता हूँ "

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     ये द्वितीय विश्वयुद्ध का दौर था, हिटलर की सेनाओं की लगभग दो सो डिवीजनों ने सोवियत संघ पर चढ़ाई कर दी थी, महान स्टालिन के नेतृत्व में मेहनतकश लाल सेनाएं हर क्षेत्र में नाजीवादी दैत्यों से मोर्चा ले रही थी-मगर शर्त के अनुसार मित्र राष्ट्रों ने सोवियत संघ की मदद के लिए दूसरा फ्रंट नहीं खोला था उनका ये मानना था कि हिटलर सोवियत संघ को खत्म कर देगा और फिर समाजवाद का उन्हें कोई डर नहीं रहेगा..... और सोवियत संघ के साथियों ने जब मित्र राष्ट्रों को शर्त याद दिलाई तो अमरीका में ये कुत्सा प्रचार किया गया कि सोवियत संघ मदद के लिए गिड़गिड़ा रहा है.... फ्रंट फिर भी नहीं खुला, मगर सवियत लाल यौद्धाओं के अतिमानवीय जज़्बे और अदम्य साहस ने नाजियों को अच्छी तरह धूल चटाकर उन्हें उनके घर जर्मनी में खदेड़ दिया था।
     उसी दौर में चार्ली चैप्लिन को रुसी युद्ध राहत की और से सन्देश मिला कि वे सभा में कुछ बोले...... चार्ली ने "कॉमरेड्स" शब्द से शुरुआत की और सोवियत संघ और उनके यौद्धाओं की वीरता के पक्ष में एक घण्टे तक बोलते रहे. यहीं से उनके लिए अमरीका में मुसीबतों की शुरुवात हुई. उन्होंने 40 बरस तक अमरीका को बहुत कुछ दिया, कला और फ़िल्म में उसका नाम चमकाया मगर इतने बरस रहने के बाद भी उन्हें बेआबरू करके वहां से भेजा गया और वे स्विट्जरलैंड में जाकर बस गए। चार्ली के जीवन का ये सबसे दुःखद पहलू था कि अमरीका उन पर शक कर रहा था कि वे कम्युनिस्ट है, और नहीं भी है तो कम से कम उनसे सहानुभूति तो रखते ही है और उनकी पार्टी लाइन पर चलते है।
        आप्रवास विभाग के अधिकारीयों के सवालों के जवाब देते हुए चार्ली ने कहा कि, " क्या आप जानते हैं मैं इस सारी मुसीबत में कैसे फसा ? आपकी सरकार पर अहसान करके ! रूस में आपके राजदूत जोसेफ डेविस को रुसी युद्ध राहत की ओर से सैन फ्रांसिस्को में भाषण देना था, लेकिन एन मोके पर उनका गला खराब हो गया और आपकी सरकार के एक उच्च अधिकारी ने मुझसे पूछा कि क्या मैं उनके स्थान पर बोलने की मेहरबानी करूँगा और तबसे मैं इसमें गर्दन फसाए बैठा हूँ।


 सतीश छिम्पा 



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